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February 6, 2013

यकीं कब था तुझे है ख्वाबों को बदलना।
सब थी चुकी बदल हाँ पर तुझे था महताब को बदलना॥
कई दिन हो चुके है बदले हुये लिबास।
अब तो है रूहो-नाम को बदलना॥
खूब रोका खुद को खुदा की तौहमत से।
अब तो लेकिन था धर्मे-ईलाही को बदलना॥
मैं तो था तैयार खुद को तुम्हारे साँचे में ढालने को।
न थी ये खबर, मुझमें नहीं, तुम्हें था मुझको ही बदलना॥
-self

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2 Comments leave one →
  1. February 7, 2013 10:03 AM

    मैं तो था तैयार खुद को तुम्हारे साँचे में ढालने को।
    न थी ये खबर, मुझमें नहीं, तुम्हें था मुझको ही बदलना

    Beautiful :))

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